मंगलवार 3 मार्च 2026 - 16:08
आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत के बाद उनके मुक़ल्लेदीन की ज़िम्मेदारी?!

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के मुक़ल्लेदीन के ज़हन मे इन दिनो एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा हो रहा है कि शहादत के बाद उनकी तक़लीद का क्या हुक्म है? फ़िक्ही अहकाम के विषय की पहचान के केंद्र के संस्थापक ने इस सवाल का जवाब दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, फ़िक्ही अहकाम के विषय की पहचान के केंद्र के संस्थापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुहम्मद हुसैन फ़ल्लाह ज़ादा ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए शहीद आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई (र) के मुक़ल्लेदीन की तक़लीद के हुक्म के संबंध मे पूछे गए सवाल का जवाब दिया है।

सवालः सलामुन अलैकुम हम शहीद आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई (र) की शहादत पर संवेदना व्यक्त करते है। उनकी शहादत की घोषणा के आरम्भिक क्षणो से अब तक बहुत से मुकल्लेफ़ीन और मुक़ल्लेदीन की और से यह सवाल किया जा रहा है कि क्या वह सुप्रीम लीडर की तक़लीद पर बाक़ी रह सकते है और उनके फ़त्वे पर अमल कर सकते है या नही?

जवाबः हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुहम्मद हुसैन फ़ल्लाह ज़ादा ने इस सवाल के जवाब मे कहा कि शहीद सुप्रीम लीडर के मुक़ल्लेदीन एक जीवित मुज्तहिद और मरज ए तक़लीद के फ़त्वे के आधार पर उनकी तक़लीद पर बाक़ी रह सकते है। अर्थात वह किसी ऐसे जीवित मरजा की ओर रजूअ करे जिन्हे वह जानते है। अगर वह मरजअ सुप्रीम लीडर की तक़लीद पर बाक़ी रहने का जवाज़ या वुजूब का फ़त्वा दे तो उसी फ़त्वे के आधार पर आयतुल्लाह ख़ामेनई के फ़त्वे पर बाक़ी और उनपर अमल किया जा सकता है।

उन्होने आगा कहा अगर भविष्य मे किसी ऐसे नए मस्अले का सामना हो जिसमे आयतुल्लाह ख़ामेनई का कोई फ़त्वा मौजूद ना हो, तो उस विशेष नए मस्अले मे उसी जीवित मुजतहिद के फ़त्वे पर अमल किया जाए जिसके फ़त्वे के आधार पर आयतुल्लाह ख़ामेनई की तक़लीद पर बाकी रहा गया है।

उन्होने अंत मे दुआ कि अल्लाह तआला पूरी दुनिया के मुसलमानो विशेष कर इस्लामी उम्मत ईरान को अमेरिका और ज़ायोनिस्ट के सामने कामयाबी अता करें।

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